Opinion Political

दिल्ली की राजनीति

जब कोई व्यक्ति किसी चीज की धीरे धीरे और निरंतर गति से जानकारी हासिल करता है तो उसकी जानकारी पूर्ण और स्थाई होती है, लेकिन वही व्यक्ति अगर तेजी बरतता है या उसे तेजी बरतना पड़ता है तो उस स्तर की जानकारी जल्दी हासिल करने के चक्कर में काफी सारी चीजों का लोप मतलब बहुत सारी चीजें छूट जाती हैं ।
उदहारण के तौर पे जब कोई नया स्टूडेंट इन्जिनीरिंग या एमबीए कर के निकलता है या उसके पढाई के दौरान ही उसे ट्रेनिंग कराइ जाती है , और जॉब में पहले प्रोबेशन पे रखा जाता है ताकि सही से सीख सके और फिर आगे जाये ।

चर्चा का मुख्य विषय है कि हमारे दिल्ली के मुख्यमंत्री राजनीति में बिना ट्रेनिंग या प्रोबेशन पीरियड के आ गए , पहली बार नौकरी लगी (४९ दिनों की सरकार) तो छोड़ के भाग गए , उतनी जिम्मेदारी बिना ट्रेनिंग के संभल में ही नहीं आई फिर चुनाव हुवे सरकार तो बहुत जोर बनी है पूर्ण बहुमत की, लेकिन जो पार्टी है उसमे राजनीतिज्ञ कोई भी नहीं , सब बिना ट्रेनिंग के , जल्दी सीखना पड़ा , बहुत सारी चीजें छूट गईं, और जब नेता ही बिना ट्रेनिंग का हो तो सीखने वाले भी तो उतना ही सीख पाएंगे न  ।

राजनीति का सबसे महान ज्ञान है आरोप लगाना , लेकिन आरोप लगाना भी आना चाहिए , ये अनुभव से आता है , ट्रेनिंग होती है , प्रोबेशन पीरियड में सीखना पड़ता है , उसका क्या स्तर होता है , किसपर कैसा आरोप लगाना चाहिए , क्या आरोप लगाने चाहिए, कौन सा आरोप सही है कौन सा बे मतलब है , इन सब बातों को ध्यान में रखना पड़ता है , गर्त की चीजों को उठा कर आरोप लगाने पे खुद के हाथ में ही गर्त का कीचड लगता है । उदहारण है दिल्ली की सरकार , सरकार चल नहीं रही है और आरोप है कि केंद्र सरकार एलजी साहब और तीन बीजेपी एमएलए के सहारे सरकार चलाना चाह रही है , स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दे रही है , नजीब जंग को केंद्र का वायसराय तक बना दिया , अरे नेता जी पूर्ण बहुमत से आये हो डर कैसा, अपने अधिकार देखो , उप राज्यपाल के अधिकार देखो , पूरी सरकार कैसे चलाओगे जब दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है , यहाँ सँभालने के लिए रखा जाता है , यहाँ राज करने को नहीं , राज करना है तो उन राज्यों में जीतो जिन्हे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त है । आरोप है कि केंद्र सरकार दिल्ली में अच्छे काम से परेशान हो गई है, क्या अच्छा काम किया २-४ गिना दो , ट्रांसफर बिज़नेस खत्म हो रहा है, क्या पता दूसरे का खत्म हो रहा हो और इस पार्टी का शुरू हो रहा हो , या फिर यहाँ विचार हो की यहाँ तो हम जीते हैं बिज़नेस हम करेंगे ?? २१ विधायकों को पार्लियामेंट सेक्रेटरी बना दिए , हाई कोर्ट से नोटिस आ गई कि जवाब दो , सब जीते तो सबको कुछ न कुछ चाहिए ही , क्यों???

राजनीति में आदमी बहुत कुछ सीखता है लेकिन यहाँ तो सीखने के बजाय सिर्फ दूसरों को सीखने की बात हो रही है , ज्ञान अधूरा ही क्यों न हो सको वही सिखाएंगे , कहते हैं अधूरा ज्ञान हमेशा खतरनाक होता है , और वो दिख भी रहा है ।

पचास प्रतिशत (५०%) वेड पूरा कर पाएंगे ऐसा कहा था , कम से कम वो तो पूरा करने की सोचिये , कौन रोक रहा है , ट्रांसफर पोस्टिंग का बिज़नेस टेकओवर करने थोड़ी न आये हैं , काम करने आये हैं काम करिये , काम के वादों पे जनता ने वोट दिया , काम तो कुछ हो नहीं रहा अधिकार सारे चाहियें , अरे ट्रांसफर पोस्टिंग किसी और की है तो उससे और जैम के काम कराइये , हर काम का ध्यान रखिये , कुछ कमी है तो पूछिए , केवल ट्रांसफर पोस्टिंग ही एक काम थोड़ी न रह गया है , आज तक ओइ नया प्रोजेक्ट पास हुवा कि नहीं इसका ठिकाना नहीं बस सब अधिकार दे दो ।

कोई मीडिया वाला कुछ गलत न दिखा दे वो भी जुगाड़ कर लिया था वो तो कोर्ट ने संज्ञान लिया तो रुका ।
खबर आती है यहाँ नाला बनवाया , एक फोटो अटैच कर देते हैं , यहाँ डिवाइडर अ उद्घाटन हुवा , फिर एक फोटो , प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेपर दिखाना , ये ही सबूत है जी , इससे वो सबूत थोड़ी न हो जाता है ।

क्या टीम है , २-४ फर्जी डिग्री वाले, एक पढाई छोड़ के कवि , फिर राजनीति फिर कवि और सलाहकार , असली धंधा चलना चाहिए बस , एक साइबर क्रिमिनल टाइप , एक पत्रकार जो पत्रकारिता छोड़ के नेता बन गया इन २-४ को छोड़ कर किसी का नाम नहीं सुनने को मिलता है किसी काम में , और सुनने को मिलता भी है तो या तो हाई कोर्ट की नोटिस जाने पर या किसी केस में , बहुत अच्छी सरकार चल रही है , लोग बहुत खुश है और ऐसे ही अच्छी सरकार चलती रही और अच्छे काम होते रहे तो अगली बार ७० में ७१ सीट मिलेंगी ,

स्वराज का वादा है , सब काम जनता से पूछ कर करेंगे जी , सरकार बनी तो जनता गई तेल लेने , पार्टी में तानाशाही चल पड़ी स्वराज कहाँ से रहेगा , विरोध में जो कदम उठेंगे उन्हें कुचल दिए जाते हैं , गजब का स्वराज है ।

कुल मिला के साहब जान लीजिये जनता बहुत दुखी है कि आपको वोट दे दिया , और अभी तक ख़ुशी नहीं मिली , अरे मुफ्त में कितने दिन खिलाओगे, कहा से खिलाओगे ख्याल है कुछ , अगर खिला सकते हो तो तो दिल्ली को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने के लिए पैसा कहा से लाओगे जब मुफ्त में ही सब बंटेगा ।

ध्यान दो साहब , सरकार विकास के लिए होती है मुफ्त में पैसे बांटने के लिए नहीं , दिल्ली का विकास करो ।

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