Doklam standoff ends

ढ़ोकलाम गतिरोध समाप्त, लेकिन चीन पर अब भरोसा नहीं

Doklam standoff ends

इसमें कोई शक नहीं कि ढोकलाम से चीन और भारत की सेना हटना और दो महीने से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होना दोनों देशों की जीत है। अब जब दोनों देश एक आपसी सहमति पर इस गतिरोध को मिटाने को राजी हुवे हैं तो इसमें दोनों ही देशों का आर्थिक फायदा है

वैश्विक राजनीति के मायने समझना किसी भी देश के नेता के लिए बहुत ही आवश्यक है, आज का विश्व बहुत बदल चुका है, भले ही दो देश आपस में कितने भी बड़े दुश्मन क्यों न हो , अपना वर्चस्व कायम रखने और बढ़ाने की चाहत रखते हों लेकिन अगर दोनों के आर्थिक फायदे एक दूसरे से जुड़े हैं तो कभी भी, जबतक कोई भी समझौता देशहित के विरूद्ध न हो , एक दूसरे से इस हद तक उलझना नहीं चाहेंगे कि दोनों का आर्थिक नुकसान  हो , बिलकुल यही स्थिति भारत और चीन के सामने थी , हालाँकि भारत कूटनीतिक तौर पर इस मसले पर चीन से आगे है , लेकिन फिर भी दोनों देशों के आर्थिक हित  एक दूसरे से जुड़े हुवे हैं .

फ़िलहाल यह गतिरोध तो टल चुका है लेकिन यह कितने दिन के लिए टला है यह नहीं कहा जा सकता , इसके पीछे सबसे बड़ा कारण  है चीन की विस्तारवादी नीति. अपनी इस नीति के हिसाब से चीन का सरे पड़ोसियों से सीमा विवाद है और चीन हमेशा ही यथास्थिति को बदलने की कोशिश करता है और यही  विवाद का कारण  बनती है |

ढ़ोकलाम विवाद का हल फिलहाल के लिए तो निकल चुका है लेकिन भारत को इस मसले पर कभी भी करना चीन पर भरोसा नहीं करना चाहिए , क्योकि चीन माने या न माने , ये निश्चित तौर पर चीन की कूटनीतिक हार है और चीन एक घायल साप की तरह इसका बदला लेने के मौके की तलाश में रहेगा और भारत को चीन के हर उस कदम का ध्यान रखना होगा और उसे तैयार रहना होगा , चीन हिन्द महासागर में, कश्मीर में , अरुणांचल प्रदेश में , नेपाल और भूटान में या फिर बांग्लादेश में, कहीं भी भारत विरोधी कूटनीति को अंजाम दे सकता है और अपनी सेना का हिन्द महासागर में आक्रामक तौर पर इस्तेमाल कर सकता है , भारत को इसके हर कदम का और आक्रामक तरीके से जवाब देने के लिये तैयार रहना होगा |

ढ़ोकलाम मसले पर विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति

http://mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/28893/Press_Statement_on_Doklam_disengagement_understanding

और जैसा की जनरल विपिन रावत ने भी कहा कि भले ही यह मसला फ़िलहाल के लिए सुलझ चुका हो लेकिन भविष्य में ऐसी और घटनाये होने की उम्मीद से इंकार नहीं किया जा सकता, इसका कारण चीन  की यथास्थिति को बदलने की नीति ही है |

जनरल रावत के भाषण के कुछ अंश

“ Blaming China for the ongoing standoff at Doklam, near the Sikkim-Bhutan-Tibet tri-junction, Indian Army chief General Bipin Rawat said on Saturday that it was a consequence of Beijing’s attempt to change the “status quo.”

“During flag meetings with China, we tell them that we (India and China) should go back to the pre-June 16 position at Doklam plateau. But we haven’t been able to come up with a resolution as there are different perceptions about how it should be done. Hence, it should be dealt with at diplomatic and political levels,” he said. Gen Rawat was in the city to deliver the General B C Joshi Memorial Lecture, titled “India’s challenges in the current geo-strategic construct” at Savitribai Phule Pune University.

“Let’s say this stand-off gets resolved, but our troops on the border should not feel that it cannot happen again. Such instances are likely to increase in future… My message to the troops is to not let down the guard,” he said.

“The LAC has not yet been settled between the two countries, and hence each country has a different perception about it. So, at times, you have a clash as each one tries to patrol the area up to its limits. But these things are normal. Our aim is not to escalate things and get back to normalcy. We are living on the border peacefully,” he told reporters on the sidelines of the lecture.On China, Gen Rawat said, Chinese armed forces had made significant progress in capabilities regarding force mobilisation, application and sustenance of operations. He said China continues to enhance influence in the regional security environment “by increasing defence/economic partnerships in the neighbourhood, especially in Pakistan, the Maldives, Sri Lanka and Myanmar. The CPEC passing through POK challenges India’s sovereignty”.

He expressed concern over the increasing presence of transnational actors in Pakistan with fundamentalist ideologies.”Pakistan’s unabated reliance and support to jihadi groups has serious ramifications. This can lead to the possibility of Pakistan being a conduit for eastward spread of fundamentalist ideology,” Gen Rawat added. He refused to comment on Lt Col Prasad Purohit’s case, saying that the matter was still sub judice.

The Indian Army had recently sent an invitation to China for an Indo-China joint military exercise in October. “However, we are yet to get a response from the Chinese counterpart,” Gen Rawat said.”

 

जनरल रावत का पूरा भाषण

https://www.youtube.com/watch?v=RI1liquZfHs 

 

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