Opinion

सियासी चाँद

वैसे चाँद तो रोज निकलता है लेकिन सियासी चाँद साल में एक बार रमजान और ईद के मौके पर ही खिलता है । ईद का मौका तो वैसे पावन होता हैं पर उनके लिए जो रोजेदार होते हैं , वो गाली नहीं देते, दुसरो का नुक्सान नहीं करते लेकिन कुछ लोगों के लिए ये बिलकुल भी पावन नहीं , वो गाली भी देते हैं , दुसरो का नुक्सान भी करते हैं , लोगों को मारते भी हैं और सबसे ज्यादा नियम भी तोड़ते हैं । मुझे ये समझ नहीं आता कि इन मौको पर बिना नियम माने गाड़ी चलाना क्या कोई शौक है क्या ये त्यौहार का नियम है ?? अभी कुछ दिनों पहले एक वीडियो वायरल हुवा था जिसमे ३ लोग एक ट्रैफिक पुलिस वाले को पीट रहे हैं वो भी इसलिए कि उसने बिना हेलमेट एक ही स्कूटर पर जाते हुवे तीन लोगों का चालान काट दिया था , वो रोजेदार रहे होंगे लेकिन क्या फायदा उनके रोज रखने का ?

कुछ भी हो , ऐसे मौको का फायदा नेता गजब उठाते हैं, मुबारकबाद देने तक ठीक है लेकिन जो भेष बदल कर इफ्तार पार्टियों में शामिल होते हैं और सोचते हैं कि जालीदार टोपी पहन लेने से उनका मजहब बदल जायेगा और वोट बढ़ जायेगा तो वो बेवकूफ हैं , उनसे भी बड़े बेवकूफ वो हैं जो ऐसी ठगी करने वालों से ठगा जाते हैं और उनको वोट देते हैं । उदहारण काफी हैं यूपी में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की दी हुई इफ्तार पार्टी , बिहार में लालू , नितीश कुमार और अन्य , दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की इफ्तार पार्टी , दरअसल ये नेताओं की इफ्तार पार्टी काम सेक्युलर ड्रेस कम्पटीशन ज्यादा लगती है , अरे मुबारकबाद दो, पार्टी का आयोजन करो, खाओ पियो , बैठो लेकिन ये जो कपडे बदल कर ठगी करते हो वो किस लिए , एक भगवा पहनने वाला भी अपने दोस्तों को ईद की मुबारकबाद देता है लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि ईद के दिन कुरता पजामा , गमछी जालीदार टोपी पहनना जरूरी है ।

ये सियासी चाँद तबतक खिलता रहेगा जबतक लोग ऐसे लोगों से ठगाते रहेंगे , एक बार तुम ठगाना बंद कर दो , अगली साल से देखो न ये इफ्तार पार्टी देंगे और न कपडे बदलेंगे , ये सियासी चाँद खिलाने वाले नेता तबतक सियासी चाँद खिलाते रहेंगे जबतक लोग इनकी ठगी का शिकार होते रहेंगे ।

सावधान हो जाओ ऐसे ठगी करने वालों से , क्या पता ये ठगी करने वाले आगे ऐसी ठगी कर दें कि तुम दुबारा ठगने लायक ही न बचो ।

ईद मुबारक

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