भारतीय कानून व्यवस्था पर एक व्यंग और सुझाव…..मै भी अपराधी बनूँगा, मैं भी बेल पाउँगा …

भारतीय कानून व्यवस्था का बहुत बहुत शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जो मुझे ये लिखने के लिए प्रेरित कर रहा है और ये कह रहा है कि अब अपराधी बनना कितना आसान है , क्या होगा जो मैं अपराधी बन गया , सजा पाउँगा , आगे अपील करूँगा सजा रद्द करवा लूंगा , बेल भी ले लूंगा ।

भरोसा तो जैसे कानून से उठता ही जा रहा है, क्या फर्क है एक अपराधी और एक शरीफ आदमी में , क्यों हम कानून से डरें, क्या होगा अगर मै अपराध करूँ , अपनी गाडी के नीछे ४-६ लोगों को दबा के मार दूँ , मैं भी आय से अधिक संपत्ति रखूं , कोई क्या कर लेगा जब मुझे पता है कि मेरी सजा कोर्ट रद्द कर देगा, मै भी महंगे वकील से केस लड़वाउंगा, मै भी गलत को सही और सही को गलत सिद्ध करवाऊंगा , मै पैसे वाला हूँ साहब मेरा कोई क्या कर लेगा ।

क्या होगा जो मैं अपराध करूँगा , केस दर्ज होगा , होने दो; कोई कुछ सिद्ध नहीं कर पायेगा क्योकि यहाँ १३-१८  साल लगते हैं कुछ भी सिद्ध करने में , कोई क्या कर लेगा मैं केस में अपने ऊपर आरोप भी बदलवा लूंगा, मान लो आरोप सिद्ध भी हुवा तो क्या जेल जाने से पहले मैं बेल ले लूंगा, कोई कितना फाइन चार्ज करेगा मेरे पास आय से अधिक संपत्ति होगी तो मै कितना भी फाइन दे सकता हूँ ; कोई क्या कर लेगा जब मुझे पहले ही पता है कि मेरी सजा कहीं न यहीं से रद्द ही कर दी जाएगी ।

वैसे तो कानून के अनुसार ‘सत्यमेव जयते’ होता है लेकिन वाकई यहाँ की कानून व्यवस्था ऐसी हो गई है जो की अपराध को बढ़ावा देने के लिए काफी है , जहाँ छोटे मोटे अपराधियों को लम्बी सजा हो जाती है , उनको कोई पूछने वाला नहीं होता है वहीं ये बड़े अपराधियों के कत्ल के अपराध को गैर इरादतन हत्या करार दिया जाता है, एक आय से अधिक संपत्ति रखने वाले को बेल भी मिलती है और उसकी सजा भी रद्द कर दी जाती है, काले धन की ओर कदम बढ़ा रही सरकार ये भी नहीं सोचती कि आय से अधिक संपत्ति है तो इसमें कुछ काला जरूर है , वाकई अब अपराधी बनना कितना आसान हो गया है किसी को कोई चिंता ही नहीं है कि सरकार और कोर्ट के इन फैसलों से अपराधियों के हौसले कितने बुलंद होते जा रहे हैं । अब जबकि सरकार ने काले धन में सजा को बढ़ने का प्रावधान किया है , आय से अधिक संपत्ति के मामले में बेल मिल रही है और सजा रद्द हो रही है , कौन डरेगा कि काला धन वालों को गंभीर सजा होगी , उसे भी लगेगा कि बैल तो मिल ही जाएगी , मेरी भी सजा रद्द हो जाएगी । अरे हुजूर अगर सजा रद्द ही करनी है तो उनकी करो जो बेगुनाह होते हुवे भी जेल में पड़े हुवे होंगे किसी दूसरे का अपराध अपने सर पे लिए हुवे , या जबरदस्ती दोष साबित कर दिया गया होगा ।

मेरे जैसे लाखो लोग यही सोच रहे हैं लें मैंने लिखने की हिम्मत की है , सोचिये क्या होगा अगर ऐसा ही चलता रहा , ऐसे ही दोषियों की सजा रद्द होती रही , ऐसे ही लोग बरी होते रहे , ऐसे ही बेल मिलती रही । ये फैसले जो आप कर रहे हैं न इससे न केवल अपराधियों को बल मिल रहा है बल्कि ये नए अपराधियों को पैदा करने के लिए काफी है ।

सजा का सिस्टम ऐसा होना चाहिए कि अगर गलती है तो सजा होना तय हो , एक बार आरोप तय हो जाये तो सजा हो ही , फिर चाहे जमीन फट जाये या आसमान हिल जाये अगर कोई अपराधी है तो कोई उसे सजा से मुक्ति न दिल सके चाहे कोई कितना भी बड़ा और महँगा वकील क्यों न हो ।
इस सिस्टम को सुधारना जरुरी है , और जबतक ये सिस्टम नहीं सुधर जाता , हमारे जैसे आलोचक पैदा होते रहेंगे ।
जय हिन्द

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