Political

नौटंकी अनलिमिटेड

राजनीतिक हमदर्दी की दुकान कहूँ या आम आदमी पार्टी कहूँ , बहुत कन्फ्यूजन है भाई , डॉ साहब अपने शब्दों में वो चिट्ठी पढ़ देते हैं जिसमे गजेन्द्र की हैंडराइटिंग ही नहीं है, आशुतोष बोल देते हैं कि अगली बार केजरीवाल को पेड़ पे चढ़ा दूंगा (आगे भी कोई प्लान है क्या ऐसा???) , मनीष सिसोदिया जिनके गजेन्द्र से संपर्क में होने की बात आ रही थी खामोश पड़े हैं और केजरीवाल माफ़ी मांग रहे हैं , उस डीएम से जांच करवा रहे हैं जिसके अधिकार छेत्र से बाहर की घटना है (बस्सी साहब के अनुसार) ।

राजनीतिक तूल खुद देने पर जब दाव उल्टा पड़ रहा है तो आज सारे आम आदमी पार्टी के नेता हमदर्दी देने में जुट गए हैं , आशुतोष तो फफक फफक के रो पड़े , सजा मांग रहे हैं , कल दो चार और नेता आएंगे , रोआ रोहट मचा देंगे , और दो चार रैलियों में ” अगर हम दोषी है तो सजा दो ” का नारा लगा देंगे , मै कहता हूँ सजा देनी है तो उन सबको मिलनी चाहिए जो कैमरे में फुटेज उतार रहे थे , उन सबको दो जो तालियां बजा कर उकसा रहे थे , उन सबको दो जो मंच पे बैठ कर तमाशा देख रहे थे , उसको दो जो आत्महत्या के बाद पूछ रहा है कि”लटक गया? ” उसको दो जो मरने के बाद भी भाषण देने और राजनीति करने में व्यस्त था , मैं तो कहता हैं इन सबके खिलाफ ‪#‎AttemptToMurder‬ का केस दर्ज करो , और अगर सजा ही चाहिए तो मैं अपील करता हूँ गजेन्द्र के परिवार से , सीबीआई जांच के लिए रिक्वेस्ट डालो , दोषी को खुद सजा दो , उसी पेड़ पे लटका के मारो और अगर जांच में आम आदमी पार्टी का कोई भी मिलता है तो वही झाड़ू पूरा का पूरा उसके &%$# में उतार दो ।

ये सब क्यों , एक लैंड बिल के विरोध के लिए ??? आखिर क्यों किसी की जान से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते ये नेता ??
ये माफ़ी मांगेंगे , मुआवजा देंगे , क्या तुमसे गरीब दिख रहा है वो, या फिर तुमसे कम खेत था उसके पास , क्या वो चुनाव नहीं लड़ा है तुम्हारी तरह , तुम्हे तो उसकी जान से खेल लिया , अपनी रोटी सेंक ली , अगर तुम्हारे माफ़ी मांगने से , तुम्हारे मुआवजे से उनकी जान वापस आ सकती है तो बेशक माफ़ी मांगो , मुआवजा दो लेकिन अगर तुम दोषी हो तो तुम्हे भी वैसी मौत ही मिलनी चाहिए ।

अगर ऐसी ही हमदर्दी है तो आज तक जितने किसानों ने आत्महत्या की है उन सबको मुआवजा क्यों नहीं देते , इसी को क्यों , क्योंकि ये तुम्हारी वजह से मरा, क्योकि इसकी जांच होगी तो दोषी पकड़ा जायेगा , क्योकि इस मामले ने राजनीतिक तूल ले लिया है , क्या यही कारण है ????

काफी सवाल हैं , क्यों दिल्ली पुलिस के मना करने के बावजूद वहां रैली हुई ??
क्यों एक अच्छे घर के आदमी को , जो एक व्यापारी भी है , गरीब किसान कह कर साजिशन हत्या को आत्महत्या कहा जा रहा है ??
क्यों डॉ कुमार विश्वास ने चिट्ठी में अपने शब्दों का प्रयोग किया ???
आखिर उसको कोई बचने क्यों नहीं गया जब इतने सारे आम आदमी के कार्यकर्ता वह मौजूद रह कर फोटो खीचने में व्यस्त थे ??
क्यों ‪#‎prestitutes‬ ने केवल ‪#‎TRP‬ के लिए उसको मर जाने दिया ???

आज राजनीति में मानवता का कोई स्थान नहीं है क्या???
क्या आज पैसों के लिए किसी को मर जाने दिया जाता है ??

जबतक इन सवालों के जवाब और जांच की रिपोर्ट नहीं आ जाती है, इस विषय पे कोई राजनीति न हो, और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो कोई Trail न हो कोई केस न चले , सीधा उसी पेड़ पे फांसी दे दो ताकि उसके घर के लोगों को सुकून मिले , उनका विश्वास क़ानून में बना रहे और देश के किसानों का भी भला हो ??

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