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नेपाल का भूकम्प दिल्ली तक क्यों आया और आया तो गुजरात क्यों नहीं पहुंच पाया #व्यंग

खैर भूकम्प तो एक प्राकृतिक घटना है , इसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन बचा जरूर जा सकता है , तरीके कई  हैं, पहले तो प्रकृति का अनावश्यक दोहन न करें , दूसरा बचने का तरीका है घरों से बहार निकल जाएँ , और तीसरा तरीका जो स्वयं भगवान ने सुझाया है कि पाप न करें , क्योकि पापों की सजा इंसान अपने उसी जनम में पाता है,  अब सवाल ये उठता है कि किन कारणों से आया ये भूकम्प , प्रकृति का दोहन तो खैर हो ही रहा है लेकिन साथ के साथ पाप की मात्रा भी तो बढ़ गई है , अब उतने दूर का भूकम्प दिल्ली में कैसे आया , क्या दिल्ली में पाप ज्यादा होते हैं , उत्तर है हाँ , एकदम होते  हैं
सबसे पहले अगर प्रदेश का राजा ही प्रजा को धोखा देने लग जाये तो उससे बड़ा पाप कोई नहीं , बेवजह लोगों को मारना (हालाँकि अभी इसकी पुस्टी बाकी है ) लेकिन भूकम्प ने इसकी पुस्टी कर दी है , इतने रेप , चोरी की घटनाये , सब तो पाप ही हैं , तो भूकम्प का दिल्ली आना तो बनता था , आखिर पापियों से मिल के जो जाना था ।
अब रही दूसरे प्रदेशों की बात , उत्तर प्रदेश का राजा अपनी प्रजा में भेद रखता है और ये राजधर्म का अपमान है , राजधर्म का पालन न करना भी पाप है पश्चिम बंगाल और बिहार की कहानी तो सुनाने लायक ही नहीं है , वह की चर्चा सुन के तो पाप भी शर्मा जाये , आखिर ऐसा क्यों हुवा कि भूकम्प गुजरात नहीं पहुचने पाया , क्योकि गुजरात में पाप नहीं हुवे हैं , वहां तो शराब तक बैन है ।

इस व्यंग से राजनेताओं को शिक्षा लेनी चाहिए  कि मालिक राजधर्म का पालन करो , बेवजह हत्या न करो , अपने किये गए वादे निभाने की कोशिश तो करो , प्रजा में असमानता न रखो ।

राजनीति का उद्भव प्रजा पर राज करने के लिए नहीं , प्रजा की सेवा करने के लिए हुई है तो प्रधान सेवक की तरह सेवा करिये और अपनी प्रजा का समर्थन पाइए , नहीं तो प्रजा प्रजा होती है , और प्रजा जब लात मारती है तो राजा किसी लायक नहीं रह जाता । अतः सावधान

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