Opinion Political

निंदक नियरे राखिये …

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

यही दोहा याद आता है जब कोई अपने आलोचकों को उनके आलोचना के बदले सजा देने की बात करता है ।

यद्यपि आलोचक निश्चय ही आपकी कमियों को गिनवाते है, आपको आपकी वास्तविकता का एहसास करवाते है परन्तु वह वो व्यक्ति होता है जिसकी आलोचनाओं की सहायता से आप अपने कार्यों को काफी हद तक सुधार सकते हैं । बड़े बुजुर्गों ने कोई भी चीज बिना अर्थ के नहीं लिखी, निश्चय ही हमारे जीवन में उसका महत्वपूर्ण सहयोग है |

मीडिया चैनलों से पता चला कि केजरीवाल ने मीडिया के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है, वो ये भी कह रहे हैं कि दिल्ली सरकार के खिलाफ खबरें दिखाई तो वो कार्यवाई करेंगे । ये सुनकर अत्यंत दुःख हुवा कि जो पार्टी स्वराज का नाम लेकर सत्ता में आई थी , जो सरकार हर बात में जनता की राय लेने का दावा करती थी, वही सरकार आज एक तानाशाह की तरह व्यवहार कर रही है । वो ऐसा रवैया अपना रही है जो ये दिखा रहा है कि हमारा हर कार्य हमेशा सही होगा, हमें किसी से कोई सुझाव नहीं चाहिए ।

आलोचकों का हमारे जीवन में बड़ा सहयोग रहा है , इतिहास गवाह है कि बिना आलोचकों के कोई भी शासक न तो अपना राज्य संभाल पाया है और न ही अपने राज्य का विस्तार कर पाया है, शक्ति इतनी भी असीमित हो, बिना आलोचना के शासक अपने मद में चूर होकर गलतियां कर बैठता है और अपने राज्य से हाथ धो बैठता है । आलोचनाएँ आपको शक्ति प्रदान करती हैं , जो आपको अपनी गलतियां सुधरने का मौका देती हैं और भविष्य के लिए रणनीति बनाने का अवसर भी प्रदान करती हैं , अतः आलोचनाओं का हमेशा स्वागत करना चाहिए ।

उदहारण कई हैं , ये सरकार जो दिल्ली में अभी शासन कर रही है, इसी के कार्यों की गिनती करें तो झोपड़ियां नियमित करने, सीवरों के उद्घाटन करने और कुछ २-४ और हल्के कार्यों के अलावा सारे कार्य भविष्य की दृष्टि से नहीं किये गए हैं , बिजली पानी तो बिलकुल ही निकट भविष्य के लिए है, इनको ये समझना चाहिए जब हमारा अपना कुछ नहीं है तो हम उसे कितने दिन मुफ्त में बाँट पाएंगे, हम उधर की जिंदगी जीकर दूसरों की भलाई कितने दिन कर सकेंगे , शायद इन्हे भी ये अंदाजा हो लेकिन जब तरीके की चिंता किये बिना हम परिणाम लेने की कोशिश करते हैं तो भविष्य भयावह होता है, जो कि आने वाले समय में होने वाला है । चिंता उन लोगों को करनी चाहिए जो यहाँ के नियमित निवासी हैं , बाहर के लोगों का क्या है , आज यहाँ रोजगार है कल कहीं और होगा , लेकिन यहाँ के निवासी तो यहाँ रहेंगे भी , यहाँ की सुविधाएँ भी लेंगे और गलत निर्णय पर उसका परिणाम भी भुगतेंगे और ये बात तो पूरी तरह जनता के निर्णय पे निर्भर करता है कि उनका शासक कैसा हो किन्तु शासक के भी तो कुछ कर्त्तव्य होते हैं , स्कूल में सबसे शरारती बच्चे को मॉनिटर बना दो तो उसे भी जिम्मेदारी का एहसास होता है , उसी भी शरारतें कम हो जाती हैं , ठीक वैसे ही सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए ।

ऐसा नहीं है कि ये आलोचनाओं वाला सुझाव केवल आम आदमी पार्टी और उसके सदस्यों तक सीमित है, सभी शासकों को ये बात ध्यान में रखनी चाहिए , शासक ही क्यों हम सभी को ये बात याद रखनी चाहिए कि अगर हम किसी के द्वारा गिनाये हुवे कमियों को स्वीकार कर के उसमे सुधार नहीं कर सकते तो फिर हम भविष्य में अथाह गलतियां करने वाले हैं , और अगर हम कमियों को सुधार नहीं सकते तो फिर कोई हक़ नहीं कि हम उन आलोचकों को कमियां बताने से भी रोकें , ये आलोचकों का जन्म सिद्ध अधिकार था, है, और हमेशा रहेगा ।

अतः आलोचनाओं का स्वागत करें , कमियों को सुधारें…..

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