Opinion

देश की इज्जत करो , देश तुम्हारी इज्जत करेगा

मदनी ने कहा कि वो किरायेदार नहीं , देश के मालिक हैं ।

चलो मानते हैं कि तुम खुद भारतीय होना चुने हो , अपना घर मानते हो और खुद को मकान मालिक मानते हो , अच्छा है कि तुम्हारे मुह से ये सुनने को मिल रहा है लेकिन अगर मकान मालिक हो तो इस मतलब ये नहीं कि मकान बेचने की कोशिश करो, ये देश मकान नहीं जो बेच दो ।

तुम तो जमीयतुल-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव हो , समझाओ अपने भाइयों को , दूसरों को कुछ बोलने से पहले अपने भाई जानों को जो हैदराबाद , कश्मीर , यूपी पश्चिम और जगह जगह बैठे हुवे उनके छोटे छोटे भाई जान जब भी देश को बेचने की कोशिश करते हैं, देश विरोधी भाषण देते हैं , धार्मिक हिंसा फैलाते हैं , पाकिस्तानी झंडा फहराते हैं , आतंकवादी बन जाते हैं , अलगाववादियों का साथ देते हैं , दंगा फैलाते हैं , पहले उनको बोलो कि देश विरोधी काम बंद करें , धार्मिक हिंसा न फैलाएं , जब ये चीजें बंद होंगी सबकुछ सही होगा ।

इतना बड़ा संगठन , इतना प्रभाव किस काम का, जब तुम्हारे जैसे ही कुछ लोग देश विरोधी बयान दे देते हैं, कश्मीर में पाकिस्तान का झंडा फहराते हैं , हिन्दू मुस्लिम राजनीति करते हैं , तुम्हारे जैसे लोग ही मौका देते हैं इन जो कि देश के नेता मुसलमान की राजनीति करते हैं, जिस दिन पहली बार वो तुम्हे लालच दे कर मुसलमान की राजनीति शुरू की थी तभी तुम्हारे जैसे लोगों को बोलना चाहिए था कि हम हम देश के नागरिक हैं हम इसी देश के हैं और हमें बांटने की राजनीती न करो , तो ये तो बोलने में शर्म आती है , वन्देमातरंम् बोलना इस्लाम विरोधी हो जाता है , राष्ट्रगान पर खड़ा होना , झंडे को सल्यूट करना इस्लाम विरोधी हो जाता है , जब तुम्हारे ही जैसे लोग ऐसा काम करते हैं तो उन्हें क्यों नहीं बोलते कि ये हमारा देश है , इसकी इज्जत करो ।

दिखावटी सेक्युलर बनने का नाटक बंद होना चाहिए , कभी हम भी सेक्युलर हुवा करते थे , सोचते थे हिन्दू मुस्लिम एक ही देश में रहते हैं , भाई भाई की तरह , ठीक तो है , अच्छा है,  समाज चल रहा है सद्भाव है , हमें क्या पता था ये आगे दोस्ती और पीछे से छुरा लिए बैठे हैं ।

कितने उदहारण दूँ , हर जगह तो यही है – बस देश का विरोध , आतंकवाद और भड़काऊ भाषण । मै पूछता हूँ जब सब इसी देश के हैं तो सबको बराबर क्यों नहीं रखा जाता , लागू करो “समान नागरिक संहिता”, क्यों हर चीज में रिबेट मिले ; मस्जिद पे लाउडस्पीकर लगे तो मंदिर पे भी लगे, मंदिर से हटे तो मस्जिद से भी हटे ; ये दंगे फसाद बंद हों , ये देश विरोधी गतिविधियाँ बंद हों , देश की इज्जत करो ।

किसने कहा है कि ये देश तुम्हारा नहीं है ? बेशक है लेकिन गिलानी , मसरत आलम,  आसिया अंद्राबी और इनके जैसे लोग देश में रहने लायक नहीं हैं , और जो देश में रह रहे हैं उनको खुद समझाओ और अपने संगठन जमीयतुल-उलेमा-ए-हिंद के लोगों से भी बोलो कि ऐसे लोगों को समझाए , ऐसे ही क्या जितने भी देश विरोधी हैं या तो समझाओ या तो उनको बोलो अगर इज्जत नहीं कर सकते तो वहां जाओ जिसके तलवे चाटते हो और चाटना चाहते हो , जो देश का , इसके संविधान का और इसके लोगों की इज्जत करें उनका हमेशा से स्वागत रहा है इस देश में ।

जय हिन्द

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