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अमेरिका के ‘भारत में धार्मिक स्वतंत्रता’ रिपोर्ट पर एक भारतीय की कड़ी प्रतिक्रिया

अभी आधे घंटे पहले की बात है THE WALL STREET JOURNAL में एक न्यूज़ पढ़ रहा था , उसमे इंडिया ने ‘US REPORT ON RELIGIOUS FREEDOM’ को रिजेक्ट कर दिया है , रिपोर्ट में ये कहा गया है कि बीजेपी की सरकार के आने के बाद हिन्दू संगठन ज्यादा प्रभावशाली ढंग से और आक्रामक तरीके से धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।(….The commission’s 2015 report said that since Narendra Modi’s party took over, religious minorities have been subject to derogatory comments by politicians linked with his Bharatiya Janata Party, violent attacks and forced conversions by Hindu nationalist groups.
Both Mr. Modi and the BJP have Hindu nationalist roots. Since coming to power, the Indian leader’s agenda has focused on economic development. But some BJP figures and leaders of conservative Hindu groups have become noticeably more vocal in proclaiming that India is a Hindu nation….)

वैसे तो भारत सरकार ने रिपोर्ट ख़ारिज करते हुवे बहुत ही अच्छा जवाब दिया है कि उनकी रिपोर्ट उनकी भारत, इसके संविधान और समाज की सीमित समझदारी पर आधारित है और कहा कि ऐसी रिपोर्ट का हम कोई संज्ञान नहीं लेते। (…The Indian government said the report appeared “to be based on limited understanding of India, its constitution and its society,” said a spokesman for India’s Ministry of External Affairs in a statement on Thursday. “We take no cognizance of this report.”…)
मैं इस खबर को एक और खबर से जोड़ कर देखता हूँ, जिसमे भारत के कुछ हजार एनजीओ के लाइसेंस रद्द कर देने पर अमेरिका ने भारत सरकार से स्पस्टीकरण माँगा है, साक्ष्य हो या नहीं लेकिन इस बात में पूरी तरह की सच्चाई है कि वो सारे एनजीओ, जिनमे विदेशों से पैसा आता है , या तो उसमे उनका एजेंडा होता है या वो खुद विभाजन की नीतियों पे काम करते हैं जो की बहार से बैठे उनके आका देते रहते हैं , अमेरिका ने ही क्यों स्पस्टीकरण माँगा , क्योकि वहीँ से सबसे ज्यादा पैसा इन एनजीओ को आता है और अगर विदेशों से आने वाले पैसों पे भारत सरकार नियंत्रण रख्हेगा तो इससे उनका एजेंडा खराब होगा और इससे यहाँ के विषयों पर उनकी सीढ़ी पकड़ ढीली पड़ेगी और ये उनके हित में नहीं है इसीलिए वो स्पस्टीकरण मांग रहे हैं ।
अब बात रिपोर्ट पर, खुद अमेरिका में जितना नस्लभेद है उन्हें सबसे पहले खुद के देश को देखना चाहिए , काले गोरे का भेद , हिन्दू मंदिरों पर हमले , और दूसरों के साथ जिस हिसाब का सुलूक वहां होता है , उनो खुद की रिपोर्ट दुनिया में भेजनी चाहिए ताकि पूरी दुनिया को पता चले की दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर देश के अंदर इसकी खुद की जनता में ही कितने असमानताएं हैं ।
दूसरी बात वह से बैठे बैठे जो लोग हमारे देश में धर्मान्तरण का एजेंडा चलते हैं , वहां की सरकार को उनपे ऱोक लगनी चाहिए ताकि यहाँ के लोगों को घरवापसी का तरीका न अपनाना पड़े, अगर तुम पहले कोई एक्शन नहीं करोगे तो यहाँ का कोई रिएक्शन नहीं होगा ।
तीसरी अगर तुम्हे रिपोर्ट बनानी है तो अभी नेपाल जाओ और उन मिशनरीज़ की रिपोर्ट बनाओ जो ये कहते घूम रही हैं की टूटे हुवे मंदिरों को बनाने की क्या जरुरत और बाइबल बाँट रही हैं , उनपे रोक लगो।

अगर यहाँ की सरकार देश के भले के लिए अगर एनजीओ के फण्ड पे निगरानी रख रही है तो इससे तुम्हे क्या दिक्कत है , अगर ऐसी बात है तो बोलो यहाँ जांच के बाद जितनी भी मिशनरीज धर्मान्तरण में पकड़ी जाएँ या तो उनको जेल में बंद कर दें या देश से बाहर निकाल दिया जाये, फिर उसमे मानवाधिकार आयोग और यूनाइटेड नेशंस का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए क्योकि यूनाइटेड नेशंस में सबसे ज्यादा अमेरिका का ही प्रभुत्व है ।

मेरा सुझाव है अपने एजेंडे बंद करो और उसकी बदौलत यहाँ जो विभाजन की घटनाएँ हो रही हैं वो खुद बंद हो जाएँगी , अपने अंदर झांको फिर दूसरों की रिपोर्ट बनाओ ।

जय हिन्द

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One Reply to “अमेरिका के ‘भारत में धार्मिक स्वतंत्रता’ रिपोर्ट पर एक भारतीय की कड़ी प्रतिक्रिया

  1. you are right. the need to see their own people and need to be improved before commenting on someone else.

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